ठाकरे ने कहा - पालघर मामले में कोई धार्मिक एंगल नहीं, पूर्व पुलिस कमिश्नर ने खोली पोल


पालघर मामले को महाराष्ट्र की कांग्रेस एनसीपी और शिवसेना की सरकार रफादफा करने की फिराक में है, जबकि सच ये है की इस मामले में कहीं न कहीं स्थानीय पुलिस कर्मियों का भी हाथ है, क्यूंकि कई विडियो में साफ़ देखा गया है की पुलिस कर्मी ही साधुओं को हत्यारी भीड़ की तरह धकेल रहे थे 

ये बात भी साफ़ हो चुकी है कि घटना स्थल पर दर्जन भर से ज्यादा पुलिस वाले थे, जिनके पास हथियार भी थे, वो साधुओं को आराम से बचा सकते थे पर पुलिस कर्मी तो साधुओं को धक्का देते नजर आये 

राज्य की सरकार मामले की लीपापोती कर रही है जबकि दूसरी तरह पीटर डी मेलो नाम के इसाई शख्स का संगठन हत्यारों को बचाने के लिए मुहीम चला रहा है, दूसरी तरह राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा की - पालघर मामले में कोई धार्मिक एंगल नहीं है 



पर उद्धव ठाकरे के दावे की हवा मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर और आईपीएस रहे सत्यपाल सिंह ने निकाल दी, सत्यपाल सिंह ने जो बात कही वो आपको देखनी चाहिए 


सत्यपाल सिंह बता रहे है की वो पालघर में ही आई जी के पद पर थे, इलाका आदिवासी बहुल है और यहाँ पर अपराध न के बराबर था, पर धीरे धीरे यहाँ धर्मांतरण वाली ताकतें आ गयी जिसके बाद यहाँ सबकुछ बदल गया

दूसरी तरफ साधुओं के हत्यारों के लिए पीटर डी मेलो का इसाई संगठन अदालतों में जोर लगा रहा है, और ये भी साफ़ हो चूका है की घटना के समय वहां एनसीपी और सीपीएम के नेता भी मौजूद थे, 

साफ़ होता है की उद्धव ठाकरे की सरकार मामले को रफादफा करने की फिराक में है, जिस पुलिस ने खुद साधुओं को धक्का दिया हो उस से इस मामले में इंसाफ होगा ये सोचना भी मुर्खता ही होगी और ऐसे में मामले की सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट की SIT जांच की सख्त जरुरत है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके