सिर्फ हिन्दू लिखने पर कर दिया केस दर्ज, देश में जल्द गुलाम बनने जा रहा हिन्दू ......


मुस्लिम ढाबा, मुस्लिम होटल, हलाल शॉप, इस्लामिक ढाबा, इस्लामिक होटल, इसके अलावा इस्लामपुर, जैसे तमाम नाम भारत में मौजूद है, पर ऐसे नामो से सेकुलरिज्म खतरे में नहीं आता और ऐसे नाम पूरी तरह संविधान और कानून के मुताबिक है 

पर अगर किसी दुकानदार ने सिर्फ 'हिन्दू फल दूकान' लिख दिया तो उसके दूकान पर कुछ ही घंटो में पुलिस पहुँच गयी, पहले तो भगवान के तस्वीर लगे हुए पोस्टर को पुलिस ने फाड़ा और उसके बाद दुकानदार पर 107 का FIR भी दर्ज कर दिया

107 का FIR यानि वो दुकानदार शांति को भंग कर रहा था, उसने अपनी दूकान पर लिखा हुआ था 'हिन्दू फल दूकान', दुकानदार ने कहीं नहीं लिखा की सिर्फ मुझसे सामान लो, या किसी दुसरे से मत लो, उसने सिर्फ 'हिन्दू फल दूकान' लिखा हुआ था और पुलिस ने आकर पोस्टर फाड़ दिया और दुकानदार पर केस दर्ज कर दिया 

यानि सिर्फ खुद की दूकान को 'हिन्दू' बताने भर से कानून टूट गया, जबकि मुस्लिम ढाबे, मुस्लिम होटल, हलाल शॉप ये सब पूरी तरह क़ानूनी है, पहले तो जमशेदपुर में जो घटना घटित हुई है वो अच्छे से देखिये 


इस देश में मुसलमान खुद को मुसलमान कह सकता है, मुसलमान को 'मुस्लिम होटल', 'मुस्लिम ढाबा', 'हलाल शॉप' चलाने की पूरी आज़ादी है, पर इस देश में हिन्दू को अपनी दूकान पर 'हिन्दू दूकान' लिखने की आज़ादी नहीं है, और कहने के लिए कानून सबके लिए बराबर है 

समझना मुश्किल है की अगर मुस्लिम ढाबा, मुस्लिम होटल क़ानूनी है तो फिर हिन्दू फल दूकान कैसे गैर क़ानूनी हो गया

ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है क्यूंकि देश में ऐसा सेकुलरिज्म चल रहा है जिसका मतलब ही हिन्दुओ पर अत्याचार, हिन्दुओ का दमन है, इस सेकुलरिज्म में हिन्दुओ के लिए कोई धार्मिक आज़ादी नहीं है, आज़ादी सिर्फ मुस्लिम ढाबे के लिए है पर हिन्दू दूकान के लिए नहीं

आज एक हिन्दू खुद को दूकान पर 'हिन्दू दूकान' नहीं लिख सकता, थोड़े समय में जब जनसँख्या में थोडा और बदलाव होगा तो एक हिन्दू खुद को 'हिन्दू" तक नहीं बोल सकेगा और वो गुलाम हो जायेगा, उसे गुलाम बना दिया जायेगा, उसकी संपत्ति, महिलाओं पर कब्जे किये जायेंगे और ऐसा बांग्लादेश और पाकिस्तान में रोज होता है