भारत ने शुरू किया चीन के खिलाफ आर्थिक युद्ध, चीनी फार्मा मार्किट पर पुरे कब्जे की कार्यवाही शुरू



चीन ने अपने वायरस के जरिये दुनिया में जो उत्पात मचाया है उसका खामियाजा चीन को भुगतना होगा, आज दुनिया के तमाम देश चीन के खिलाफ आक्रोशित है और जापान जैसे देश ने चीन से अपनी कंपनियों को बाहर करना भी शुरू कर दिया है, साउथ कोरिया, अमेरिका यूरोप के देश भी चीन से कंपनियों को बाहर करने का एक्शन प्लान बना रहे है

छेने के खिलाफ अब भारत की सरकार ने भी आर्थिक युद्ध का मन बना लिया है और चीनी फार्मा मार्किट पर भारत की नजर पड़ चुकी है, दरअसल चीन दुनिया में दवाइयों के उत्पादन में होने वाले कच्चे माल का सबसे बड़ा निर्यातक है

दुनिया में बहुत सारी कम्पनियाँ है जो दवाइयां तो अपने यहाँ बनाती है पर उसका कच्चा माल जिसे आम तौर पर चूरन भी कहते है वो चीन से मंगवाती है, भारत भी दवाइयों के मामले में दुनिया में एक बड़ा मार्किट प्लेयर है पर चूँकि चीन का आर्थिक तंत्र ज्यादा मजबूत है इसी कारण अधिकतर देश चीन से ही कच्चा माल मंगवाते है

पर अब क्यूंकि कोरोना के कारण दुनिया के देशों में चीन के खिलाफ गुस्सा है, दवाइयों की फैक्ट्रीयां बंद पड़ी है, इस बीच भारत सरकार ने मौके का फायदा उठाने का मन बना लिया है

जानकारी ये सामने आई है की भारत सरकार दुनिया की सभी बड़ी दवाई निर्माता कंपनियों से संपर्क कर रही है और उनको भारत के कच्चे माल सप्लाई का ऑफर कर रही है वो भी चीन से कम कीमत पर

भारत सरकार अपने यहाँ कच्चे काम को बनाने के लिए प्रोडक्शन को भी मजबूत करने पर जोर दे रही है, भारत के पास मौका भी अच्छा है और भारत की सरकार ने इस मौके को लेकर कार्यवाही भी शुरू कर दी है, भारत चाहता है की चीन के फार्मा मार्किट पर पूरा कब्ज़ा कर लिया जाये इस से चीन को मिलने वाला सारा व्यापार और पैसा भारत की ओर मुड जायेगा और भारत की जीडीपी को इस से लाखों करोड़ डॉलर का सीधा फायदा होगा 

भारत सरकार ने कमर कस लिया है और आने वाले समय में चीन से बाहर आ रही तमाम कम्पनियाँ भारत में कम करती नजर आयेंगी, इसके कई प्रमुख कारण है और इनमे सस्ती मजदूरी, सही ट्रांसपोर्ट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में कंपनियों का भरोसा शामिल है